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जिनकी मुस्कान से निकुंज में ज्योत्सना का उल्लास विलासने लगता है जिनकी बोलने से वातावरण में वीणा की झंकार लहराने लगती है जिनके लावण्या से कानन के आँगन में सौंदर्य बिखर जाता है उन शोभामई श्री राधा – कृष्ण के श्री चरणों में मेरा प्रणाम |

"संसार से विमुख होने की अपेक्षा ईश्वर की तरफ उन्मुख होना ज्यादा श्रेयस्कर और सरल है क्योंकि ईश्वर की तरफ उन्मुख होने से संसार रूपी भव सागर से स्वतः ही विमुखता हो जाती है ! मनुष्य का स्वभाव छोड़ने का नहीं अपितु पकड़ने वाला होता है और स्वभाव को बदलना आसान नहीं होता है इसलिए स्वभाव के अनुरूप ईश्वर में मन लगा लेने से संसार का छूटना संभव हो सकता है !"

इस अपार संसार सागर में जिन लोगों के मन निरन्तर गोते लगा रहे हैं, उन्हें सब प्रकार के दुःखों से मुक्त कर अपने परमानन्दमय स्वरूप की प्राप्ति कराने के लिए अहैतुककरूणामय दीन वत्सल श्री भगवान ही स्वयं धर्मावबोधक वेद के रूप में अवतरित होते हैं ।जिस समय कालक्रम से सर्वसाधारण के लिए वेद का तात्पर्य दुर्बोध/अबोध्य हो जाता है, उस समय श्री हरि ही पुराणादि रूप में आविर्भूत/प्रकट् होते हैं । पुराणों का मुख्य प्रायोजन वेदार्थ का निरूपण करना है।किन्तु यह सब रहते हुए भी परस्पर मतभेद रहने के कारण वेदार्थ-सम्बन्धि विरोध का निराकरण भगवान की उपासना के द्वारा शुद्ध हुए अन्तःकरण से ही हो सकता है ।जिन लोगों की विवेकदृष्टि पारस्परिक विवाद के कारण नष्ट हो गयी है, उन्हें वेदार्थ का बोध कराकर परम् कल्याण की प्राप्ति कराने के लिए ही श्रीमद् भागवत जी का प्रादुर्भाव हुआ है, जैसा कि कहा है,
                                 " कृष्णे स्वधामोपगते धर्मज्ञानादिभिः सह। कलौ नष्टदृशामेष पुराणार्कोऽधुनोदितः।।"
अर्थात, धर्म और ग्यानादि के सहित भगवान् के स्वधाम सिधारने पर जिन मनुष्यों की दृष्टि कलयुग के कारण नष्ट हो गयी है, उनके लिए इस समय पुराण रूपी सूर्य का उदय हुआ है, जैसा कि कहा है, "अर्थोऽयं ब्रह्मसूत्राणां सर्वोपनिषदामपि।गायत्रीभाष्यभूतोऽसौ ग्रन्थोंऽष्टादशसंग्यितः।" अर्थात, यह श्रीमद् भागवत महापुराण ब्रह्मसूत्र और समस्त उपनिषदो का तात्पर्य है तथा यह अष्टादशसंग्यक ग्रंथ गायत्री का भाष्यस्वरूप है ।


न्यूज़

1. श्री साँवलिया सेठ के सानिध्य में मान्यवर, अत्यंत हर्ष के साथ आमंत्रित किया जाता है कि प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी परम् पूज्यनीय गुरुवर प.श्री भिमाशंकरजी शर्मा(शास्त्रीजी) (धारियाखेड़ी वाले) का

2. श्रीभागवत गुरु पूर्णिमा उत्सव व गुरु पूजा महोत्सव रखा गया है। इस पुनीत पर्व पर इष्टमित्रों सहित आप सभी की उपस्थिति सादर प्रार्थनिय है।विशेष रूप से इस अवसर पर प्रवचन कार्यक्रम आचार्य श्री मनोहरलाल जी दीक्षित,राम नगर धार के सानिध्य में सम्पन्न होगा।

3. आयोजन दिनांक 9 जुलाई 2017 रविवार हवन-प्रातः 7 से 10 बजे तक शोभा यात्रा-प्रातः 9 बजे से.. व्यास पूजन-प्रातः 10 बजे से गुरु पूजा-प्रातः10.30बजे से विशेष प्रवचन-प्रातः11बजे से प्रसादी-दोपहर 1 बजे से..... स्थान-नई कृषि उपज मंडी,महु-नीमच रोड,मन्दसौर

4. श्रीभागवत गुरु पूर्णिमा उत्सव समिति,भारत उत्थान समिति,धारियाखेड़ी एवं समस्त भक्तगण