रत्न / रत्न पत्थर

परिचय महत्‍व एव उपयोगिता इस संसार मे रत्न उपरत्न के प्रति मनुष्य का आकर्षण प्राचीन काल से ही रहा है | रत्न प्रकृति की दुर्लभ व अमूल्य देन है | मानव जीवन पर ग्रह नक्षत्रो का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है| इन ग्रहों के अच्छे तथा बुरे दोनो ही प्रकार के प्रभाव होते है | इन समस्याओ को हल करने मे रत्नो का महत्वपूर्ण योगदान होता है | ग्रहो की अच्छी एवं बुरी स्थिति के अनुसार व्यक्ति को रत्न धारण करवाया जाता है | प्रकृति की गोद से कई वस्तुएँ प्राप्त होती है | उन्हीं में से कई कीमती पत्थर भी मिलते है,, जिन्हे हम जवाहरात कहते है | जो ग्रहो के अनुसार कार्य करते है | ग्रहों की क्रूरता को कम करने तथा ग्रहों को बल देने के लिए रत्नो का प्रयोग किया जाता है | ताकि ग्रहो का प्रभाव कम ज़्यादा किया जा सके | यदि किसी व्यक्ति के शरीर मे विटामिन की कमी हो और इस वजह से कमजोर हो रहा है तो विटामिन की गोलिया लेने से उसकी कमी पूरी हो जाती है और व्यक्ति सुवस्थ एव सबल बन जाता है | उसी प्रकार विशिष्ठ रत्नो के माध्यम से व विशिष्ठ रश्मीयों को लेने मानव जीवन सुखी एवं सानंद हो जाता है एवं समस्त कष्ट एवं विघ्न बाधाएँ दूर होती है |

सूर्य चंद्रमा मंगल बुध बृहस्पति शुक्र शनि राहु केतु
रूबी पर्ल कोरल पन्ना पुखराज डायमंड नीलम Gomed Catseye